September 24, 2022
The Power Of Positive Thinking.

सही सोच की शक्ति । The Power Of Positive Thinking

The Power Of Positive Thinking

आज हम कहते हैं कि सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। लेकिन इस समय कई परिस्थितियां ऐसी आ रही हैं, जिसमें हम पॉजीटिव क्या सोचें वो भी पता नहीं चल रहा। सकारात्मक सोच का अर्थ यह नहीं है कि हम हमेशा अच्छाअच्छा सोचते रहें। इसका मतलब अच्छा नहीं बल्कि सही सोचना है। दोनों बातों में पर्क है। कोई परस्थिति ऐसी हो कि जिसमें कुछ अच्छा दिखाई न दे लेकिन उस परिस्थिति में सही क्या सोचना है, वो बहुत महत्वपर्ण है। ‘सकारात्मक सोच’ शब्द अगर इस महत्पूर्ण है।

‘सकारात्मक सोच’ शब्द अगर इस समय सही न भी लगे, तो उस शब्द को थोड़ा-सा बदल देते हैं। हम कहते हैं पावर ऑफ राइट थिकिंग यानी सही सोच की शक्ति। माना सही तो हमेशा सोचना है। हमें लगता है कि हमारी सोच मन के अंदर चल रही है तो ज्यादातर कोविड से पहले भी हमने सोच की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। अगर 2019 को भी देखें, अपने सामान्य जीवन को देखें तो सारा ध्यान किस पर था। अगर ध्यान अपने पर देना भी था तो शरीर पर देते थे। क्योंकि वो बहुत जरूरी है। उस समय शरीर पर दिया हुआ ध्यान इस समय काम आ रहा है।

The Power Of Positive Thinking.

फिर हमने अपने रिश्तों पर ध्यान दिया, उनको संभाला उनका ध्यान रखा। फिर हमने अपने घर का ध्यान रखा। और हमारा सबसे ज्यादा ध्यान जाता था अपने काम की तरफ। ध्यान मतलब ख्याल रखना, देखभाल करना। तो हमने किन-किन चीजों का ध्यान रखा। हमारे पास इतना कुछ था ध्यान रखने के लिए लेकिन वो सारी चीजें वे थीं जो दिखती थी, हमें भी और दूसरों को भी। अगर हम उनमें से किसी भी चीज पर थोड़ा ध्यान न देते तो हमें भी दिखाई देता, लोगों को भी दिखाई देता।

मान लो जिस मेज पर बैठकर आप रोज काम करते हैं अगर एक दिन भी उस पर कपड़ा ना मारें तो उस पर धूल दिखाई देती थी। तो तुरंत ही कोई बोलता था आज कपड़ा क्यों नहीं मारा। तो ध्यान रखना कितना जरूरी था। हमने उन सारी चीजों का ध्यान रखा जो हमें और दूसरों को दिखाई देती थीं। नहीं बोला कि इसे साफ करने की जरूरत है। उनको ये दिखाई देता है कि हम थोड़े मोटे हो गए हैं, हम थोड़े पतले हो गए हैं। तुम्हारा वजन कैसे घट गया। उन्हें सिर्फ वही दिखता है। लेकिन कभी किसी ने यह नहीं पूछा कि तुम्हारे मन का वजन क्यों नहीं बढ़ा, कोई भारीपन तो अंदर नहीं चल रहा।

कोई बातें तो नहीं पकड़कर रखी हैं, जिससे मन पर बोझ हो गया हो। अगर हम सोचें आज तो हमारे जीवन का सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया क्षेत्र है हमारा मन। इसका दूसरा कारण यह है कि हमने सोचा कि इसमें ध्यान रखने का है ही क्या। मन के ऊपर तो सारी दुनिया का प्रभाव पड़ता है। तो हम अगर दुनिया को ठीक कर दें तो मन तो अपने आप ही ठीक हो जाएगा। अगर मैं शरीर का ध्यान रखुं और मैं कभी बीमार न पडु, तो स्वतः ही स्वस्थ और खुश हो जाएंगे। अगर हम अपने परिवार का ध्यान रखें, सारे खुश रहें, हम अपने आप ही खुश हो जाएंगे।

अगर मेरा काम अच्छा चल रहा होगा और मैं सुबह से रात तक काम करूं, मैं और मेरा काम अच्छा चल जाए, धन अच्छे से आता जाए तो खुश नहीं होने का कोई कारण ही नहीं है। हमारी दूसरी महत्वपूर्ण गलती ये हुई कि हमने सोचा अगर दुनिया परफेक्ट होगी तो मन तो अपने आप परफेक्ट हो जाएगा। क्योंकि जब भी हम किसी से पूछेंगे कि आप इतनी मेहनत क्यों करते हैं, तो वे कहते हैं खुशी के लिए। बहुत स्पष्ट है कि खुशी के लिए करते हैं। अपनी खुशी पहले नहीं, पहले अपनों की खुशी।

वो सब खुश होने चाहिए, हमें अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में डालना है। क्यों देना है इतना सारा कुछ तो कहेंगे कि आगे जाकर वो खुश रहे। खुश होना बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है। और खुशी मन के अंदर पैदा होने वाली है। हम सोचते हैं कि बाहर सब कुछ कर लेंगे, तो अपने आप मन में खुशी आ जाएगी। लेकिन हम यह भूल गए कि मन को खुश रखने के लिए बाहर के साधन की नहीं बल्कि अध्यात्म की आवश्यकता होती है।

‘ द पावर ऑफ रिवर्स थिंकिंग ‘

The Power Of Positive Thinking.

1. प्रतिष्ठा बनाए रखें-

आपकी पहचान, आपकी प्रतिष्ठाबनाए रखना बहुत जरूरी है। बुरी प्रतिष्ठा के साथ कितनी ही बड़ी सफलता हो, आप उससे पूरी तरह खुश नहीं हो सकते। सफलता और प्रतिष्ठा में संतुलन बेहद जरूरी है

2. अच्छा करने की संतुष्टि –

जिंदगी में चीजें आपको खुशी नहीं देती। परिवार दोस्त, अच्छी सेहत और कुछ अच्छा करने, कोई सकारात्मक बदलाव लाने से मिली संतुष्टि ही आपको खुशी दे सकती है। इसलिए कुछ अच्छा करते रहें।

3. नया करने से डरें नहीं –

हमे सफलता उन्हीं मौकों पर मिलती है जब हमने खुद को चुनौतियों के बीच पाया है। ये चुनौतियां मिलती हैं, जब आप कुछ ऐसा करने की सोचते हैं जो असंभव-सा लगता है, लेकिन आप उसे कर गुजरते हैं।

4. पुराना भूलकर नया सीखें –

आगे बढ़ने के लिए यदि कुछ चीजें सीखनी चाहिए तो कुछ भूलनी भी चाहिए। आप इस वक्त जो जानते हैं, केवल उसके दम पर आगे नहीं बढ़ सकते। आपका भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि इस पल के बाद आप क्या सीखते हैं। सफलता हासिल करने का तरीका भी सीख सकते हैं।

5. नम्रता हर बात मनवा सकती हैं –

आपके अंदर धर्य है, भावनाएं व्यक्त करने की इच्छा है और साथ बैठकर बात करने के लिए तैयार हैं तो अपने मतभेद जरूर दूर कर लेंगे। यदि किसी के दिल में आपके प्रति दुर्भावना है तो तर्क देकर अपनी बात मनवाने को मजबूर नहीं किया जा सकता। अगर आप उनके प्रति विनम्र और दोस्ताना व्यवहार करें तो जरू अपनी बात मनवा सकते हैं।

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