September 24, 2022
Swami Vivekananda Speech In Hindi.

आत्मविजय ही सबसे बड़ी विजय है । Swami Vivekananda Speech In Hindi

Swami Vivekananda Speech In Hindi
आत्मविजय ही सबसे बड़ी विजय है

एक व्यक्ति कुछ विचार करता है और वह कहीं और दूसरे मनुष्य में प्रकट हो जाता है। ये केवल आकस्मिक घटना नहीं हैं। दूरी के कारण कुछ अंतर नहीं पड़ता। संदेश उस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है और वह उसे समझ लेता है। ये विचारों का संक्रमण है। मन एक अखंड वस्तु हैं, विश्व्यापी है। मानो समुद्र पर उठनेवाली छोटी छोटी लहरें ; और इस अखंडता के कारण ही हम अपने विचारों को एकदम सीधे, बिना किसी माध्यम के आपस में संक्रमित कर सकते हैं। अपना प्रभाव चलाना यही दुनिया है।

हमारी शक्ति का कुछ अंश तो हमारे शरीर के उपयोग में आता है, और शेष प्रत्येक अंश दूसरों पर अपना प्रभाव डालने में रात दिन व्यय होता रहता है। हमारे शरीर, हमारे गुण, बुद्धि, आत्मिक बल- लगातार दूसरों पर प्रभाव डालते आ रहे हैं। इसी प्रकार, उलटे रूप में, दूसरों का प्रभाव हम पर पड़ता चला आ रहा है। हमारे आस पास यही चल रहा है। एक उदाहरण देखते हैं। एक इंसान आपके पास आता है, वह खुब पढ़ा – लिखा है, भाषा भी सुंदर है, वह आपसे एक घंटा बात करता है, फिर भी अपना असर नहीं छोड़ पाता।

फिर एक दुसरा मनुष्य आता है। वह कुछ गिने शब्द बोलता है। शायद वे भी शुद्ध और व्यवस्थित नहीं होते, परंतु फिर भी वह खूब असर कर जाता है। यह तो आपमें से बहुतों ने अनुभव किया है। इससे स्पष्ट है कि मनुष्य पर जो प्रभाव पड़ता है, वह केवल शब्दों द्वारा ही नहीं होता। शब्द ही नहीं, विचार भी प्रभाव उत्पन्न करते हैं, लेकिन बाकी व्यक्तित्व का ही प्रभाव होता है। जिसे वैयक्तिक आकर्षण कहते हैं, वही प्रकट होकर आप पर अपना असर डाल देता है।

अपना आत्म विश्लेषण करना सीखें। अच्छे बुरे, दोनों ही पहलुओं को देखो और आप अभी जैसे हैं वैसे कैसे बने, इसके कारणों की मीमांसा करो बुरे गुणों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करो। अपनी कमजोरियों से कभी भी हतोत्साहित न हो, हतोत्साहित होने का अर्थ है आपने अपनी हार स्वीकार कर ली है। आपको रचनात्मक आत्म विश्लेषण द्वारा अपनी सहायता स्वयं करने में सक्षम बनना ही होगा।

प्रत्येक रात्रि को आत्मनिरीक्षण करो और अपनी मानसिक दैनंदिनी रखो और दिनभर में यदा-कदा एक मिनट के लिए स्थिर होकर क्या कर रहे हो, क्या सोच रहे हो, इसका विश्लेषण करो। आत्मविश्लेषण के दौरान इसका ध्यान रखिए कि आप एक ही स्थान पर अटककर न रह जाएं। जो अपना आत्म विश्लेषण नहीं करते, वे कभी नहीं बदलते। वे न बढ़ते हैं न घटते हैं, बस जहां है वहीं अटककर रह जाते हैं।

यह अस्तित्व की अत्यंत खतरनाक अवस्था है। किसी दुर्बलता का होना कोई पाप नहीं है परन्तु जैसे ही आप उस दुर्बलता को हटाने का प्रयास छोड़ देते हैं, आप युद्ध हार जाते हैं। जब तक आप प्रयास करते हैं, जब गिरे तो फिर उठकर चलते रहें, तब तक आपके जाने की आशा है। जीवन में सबसे बड़ा पाप यदि कोई है तो वह हार मानना ही है क्योंकि हार मानने में आप अपने भीतर के ईश्वर के प्रतिरूप आत्मा की सर्वोच्च शक्ति को अस्वीकार कर देते हैं। कभी हार मत मानिए।

अधिकांश लोग सोचते हैं, आज जाने दो मैं कल फिर प्रयास करूंगा।’ अपने आप को धोखा मत दीजिए। इस प्रकार की विचारधारा आपको विजय नहीं दिला सकती। आप कोई संकल्प कर लें और उसे पूरा करने का प्रयास कभी न छोड़ें तो ही आपकी विजय हो सकती है। स्पेन के एक शहर अविला की संत तेरेसा कहती थीं, ‘सन्त भी कभी पापी थे किन्तु उन्होंने सुधरने का प्रयास कभी नहीं छोड़ा।’ जो कभी बाधाओं के समक्ष समर्पण नहीं करते वे ही अंत में विजयी होते हैं।

हम आशा करते हैं की स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया गया यह प्रेरणादायक भाषण आपको पसंद आया होगा जो आपको सकारात्मक सोच की राह पर ले जाएगा। दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की “आत्मविजय ही सबसे बड़ी विजय है” प्रेरणादायक भाषण आपको कैसा लगा ? ताकि हम ऐसे ही ओर प्रेरणादायक आर्टिकल आपके लिए प्रकाशित करते रहें।

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