September 24, 2022
Success Story In Hindi. Inspiring Story In Hindi

Best 3 Success Story In Hindi। Inspiring Story In Hindi

Success Story In Hindi – नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे आर्टिकल Success Story में। दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके साथ M.S धोनी और युवराज सिंह की अनसुनी सक्सेस स्टोरी साझा करेंगे कि कैसे उन्होंने निचले स्तर से उठकर आज इतनी बड़ी प्रसिद्धि हासिल की। आखिर क्या बताया उन्होंने अपनी प्रसिद्धि का राज आइए पढ़ते हैं –

Success Story In Hindi

कुछ प्रेरणादायक पंक्तियां – जिंदगी वाकई बहुत छोटी होती है। हम सोने में, यात्राओं में, मनोरंजन में आधा वक्त बिता देते हैं। शायद अपनी आधी जिंदगी बिना कुछ किए ही गुजार देते हैं। 65 की उम्र में पहुंचकर हम न ज्यादा कुछ कर सकेंगे, ना लोग हमें सुनेंगे। अगर आप अभी 35 साल के हैं, तो 65 के होने में 30 साल बाकी हैं। इन 30 सालों में 9 साल तो सोने में चले जाएंगे, उन 30 सालों में दिन का उजाला बहुत सीमित नसीब होगा।

उन 30 सालों में शायद 16 साल ही काम के हो सकते हैं। इसी तरह हम सब अपनी जिंदगी को टुकड़ों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं। जीवन के आने वाले सालों के दौरान आप क्या करने वाले हैं, कैसे अपना और दूसरों का जीवन बदलने वाले हैं? यहां हर व्यक्ति अलग है। कुछ का जीवन बड़ा, तो किसी का जीवन छोटा होता है, लेकिन जाना सबको है। यहीं टेस्ट है कि हम अपनी जिंदगी कैसे बिताए।

आईने में देखें, कुछ लोगों के चेहरे पर झुर्रियां होंगी, बाल झड़ रहे होंगे, शरीर थक रहा होगा। आपका शरीर बूढ़ा होता जाता है, असली जीवन तो आपके अंदर है। कोई भी भौतिक चीज हो, उसकी एक उम्र होती है। हमारी कार, घर ये शरीर…सब नष्ट हो जाएगा। हम यहां हमेशा नहीं रहने वाले। आपका किसी भी चीज़ पर आधिपत्य नहीं है। आपके पास प्रोडक्टिव बने रहने के लिए चंद साल ही शेष हैं।

कुछ लोग ईश्वर पर भरोसा नहीं करते। कुछ करते है। दुनिया में कोई भी चीज अपने आप नहीं पैदा होती है। उसका कोई सृजनकर्ता होता है। हमें जिंदगी के आने वाले साल ऐसे अच्छे कामों में बिताना चाहिए कि ईश्वर से एकाकार हो सके। ईश्वर ये देखता है कि आप लोगों से किस तरह पेश आ रहे हैं। अपने रोजमर्रा के कामकाज में उदार रहें, अपने आसपास के लोगों से नरमी बरतें।

1. युवराज सिंह सक्सेस स्टोरी ( Yuvraj Singh Success Story In Hindi )

Yuvraj Singh Success Story in Hindi.

मैं आज भी मुड़कर देखता हू तो सुकून मिलता है। गर्व से कह सकता हूं कि अपनी जिंदगीं के सबसे मुश्किल हालातों में भी डटकर खड़ा रहा। पर जिन चीजों ने मुझे मजबूत बनाया, उनके बारे में आपसे चर्चा करना चाहता हूं। मेरे पिता हिटलर सरीखे थे। वो चाहते थे कि मैं क्रिकेट खेलू, पर मैं आरामपसंद क्रिकेट से दूर भागता था।

11 साल का था, तो एक बार रोलर स्केटिंग की चैपियनशिप जीती। खुशी से झूमता हुआ मैडल और सर्टिफिकेट लेकर पिता के पास गया। मेरी पीठ थपथपाने के बजाय उन्होंने स्केट्स और मैडल बाहर फेंक दिए और कहा कि ‘ड्रामा बहुत हो गया। आज के बाद तुम सिर्फ क्रिकेट खेलोगे।’ मुझे याद है कि मैं रोता-रोता घर गया था। तब से क्रिकेट खेलना शुरू किया।

एक बार सर्दियों में 4 डिग्री तापमान में प्रेक्टिस के लिए नहीं गया और सोता रह गया, तो उन्होंने ठंडे पानी की बाल्टी उड़ेल दी। उस वक्त बेहद गुस्सा आया। पर आज जिंदगी को फ्लैशबैक करते हुए कह सकता हूं कि यही संघर्ष जिंदगी में मजबूत बनाते हैं। 2010 की बात है। एक दिन रात में खांसी के साथ हल्का-सा ब्लड आया। लगा कि शरीर में कुछ गड़बड़ है। फिजियो को बताया कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

पर मैं टालता रहा और सोचा कि वर्ल्ड कप के बाद डॉक्टर को दिखाऊंगा। वर्ल्ड कप के बीच भी सेहत लगातार गिर रही थी, पर खेल का जुनून हिम्मत दे रहा था। फिर जब ज्यादा दिक्कत होने लगी, तो डॉक्टर को दिखाया। बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि हो गई।

मेरे लिए यकीन करना मुश्किल था कि मैं एथलीट हूं और मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है। झूठ बोलकर और डॉक्टर की बात को नजरअंदाज करके टूर पर चला गया। पर फैमिली डॉक्टर ने फोन करके डांटा और कहा कि मेरे पास सिर्फ तीन से छह महीने ही बचे हैं। कैंसर स्वीकार करने में मुझे एक साल लग गया।

जब आप बीमार होते हैं, जब आप पूरी तरह निराश होने लगते हैं, तो कुछ सवाल एक भयावह सपने की तरह बार – बार आपको सता सकते हैं, लेकिन उस दौरान आपको सीना ठोक कर खड़ा होना चाहिए और इन मुश्किल सवालों का सामना करना चाहिए। मैं छह महीने बाद पूरी तरह ठीक होकर लौटा। मुश्किलें सबकी जिंदगी में आती हैं, लेकिन अपनी जिंदगी की लकीर आपको खुद खींचना चाहिए।

बीमारी से उबरा, तो खेल प्रभावित होना स्वाभाविक था। श्रीलंका में टी-20 वर्ल्ड कप में मैंने अपने केरिअर का सबसे बुरा प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि अब केरिअर खत्म हो गया है। मैं खुद भी बिखर सा गया। मेरे घर में दो बैट दीवार पर टंगे हैं। एक छह छक्के लगाने वाला बैट है, दूसरा वर्ल्ड कप 2011 मैन ऑफ द सीरिज का बैट है। मैंने उन बल्लों की ओर देखा और खुद से कहा कि लगता है कि यही मेरी उपलब्धि है। बैग से अपनी कैप निकाली और बैट के ऊपर रख दी। और दोबारा हिम्मत जुटाकर खेलना शुरू किया।

उस वक्त 33-34 साल की उम्र थी। घरेलू क्रिकेट खेल रहा था। घरेलू श्रृंखला में 5 मैच में 800 रन बनाए। तीन साल बाद वनडे टीम में फिर से वापसी की। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे में 150 रन बनाए। जब सबने कहा कि मैं कभी वापसी नहीं कर पाऊंगा, तो टीम में चुना गया। जब कहा कि कॅरिअर खत्म है तो करियर का सर्वश्रेष्ठ वनडे स्कोर (150) बना डाला। ये सब मुमकिन हुआ, क्योंकि मैंने कभी हार नहीं मानी।

2. एम.एस.धोनी सक्सेस स्टोरी ( MS. Dhoni Success Story In Hindi )

MS. Dhoni Success Story in Hindi.

जब मैं बारहवीं की परीक्षा दे रहा था, उस समय मेरे मैच भी चल रहे थे। बोर्ड परीक्षाओं के बीच मुझे रांची के बाहर जाकर मैच खेलकर वापस आना था। पिताजी से ये बात कहने में मुझे बहुत संकोच हो रहा था। किसी तरह मैंने मां को मनाया। उन्होंने पिता को बताया। पिताजी ने सिर्फ एक ही लाइन कही- अगर साल भर पढ़ाई की होगी तो एक दिन से फर्क नहीं पड़ेगा। जब मैंने स्कूल में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया, तो सुबह 5.30 से 5.45 के बीच उठ जाया करता था। सुबह उठते साथ ही पढ़ने के लिए बैठ जाता था।

उसके बाद साड़े सात बजे स्कूल जाता था। शाम को दो-ढाई घंटे पढ़ाई करता। यही शेड्यूल सालभर चलता। परीक्षा के दिनों में भी खेलता था। आपकी सफलता-असफलता भी एक दिन से तय नहीं हो जाती। लोग सफलताओं की, रिजल्ट की बात करते है। मुझसे अकसर पुछा जाता है कि मैं इतना कूल कैसे रहता हूं। असल में रिजल्ट की चिंता आपको परेशान करती है। मन में ख्याल आते हैं कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या होगा, वैसा नहीं हुआ तो क्या होगा। क्या होगा अगर टीम में चयन नहीं हुआ।

मैं हमेशा कोशिश करता हुं कि रिजल्ट के बारे में न सोचूं। मैं इस बात में यकीन रखता हूं कि प्रक्रिया ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि उस प्रक्रिया की वजह से ही आपको रिजल्ट मिलता है। रिजल्ट के बारे में सोचने से रिजल्ट नहीं मिलता। इसलिए इस बात को सुनिश्चित करें कि आप किसी काम को करने में अपना सौ फीसदी दे रहे हैं या नहीं। हमारा बयान उन चीजों पर होना चाहिए जिन पर हमारा नियंत्रण हो। हमने किस तरह से उसकी प्लानिंग की है। उसके लिए क्या कदम उठाए हैं, किस तरह से उसे लागू करने की कोशिश की है।

जब आप छोटी चीजों पर ध्यान देते हैं, नियंत्रित हो सकने वाली चीजों पर ध्यान देते हैं, तब आपको मनमाफिक रिजल्ट मिलता है। इसके लिए आपको जिंदगी में ऐसे लक्ष्य बनाने चाहिए जिन्हें आप माप सकें। गोल तीन तरह के होते हैं शॉर्ट टर्म, लॉग टर्म और मीडियम टर्म। सबसे महत्वपूर्ण होते हैं शॉर्ट टर्म यानी तात्कालिक लक्ष्य। उन छोटे-छोटे लक्षो पर निरंतर काम करते रहिए, फिर रिजल्ट खुद-ब-खुद अच्छा मिलेगा। और आपको रिजल्ट का तनाव लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

मैं भी इमोशनल इंसान हूं, लेकिन मैं इसे जाहिर नहीं करता। अपनी भावनाओं पर काबू रखता हूं। हम भारतीयों का ध्यान भावनाओं पर ज्यादा होता है इसलिए मूल चीज से भटक जाते हैं। मुझे क्या करना है, आगे क्या किया जा सकता है, इस पर फोकस करने से आप अपने इमोशंस को काबू में रख सकते हैं। मेरे लिए जिंदगी में ईमानदार होना सबसे ज्यादा जरूरी है। जो भी काम कर रहे हैं, उसमें अपना सौ फीसदी देना बेहद जरूरी है। जब आप सब कुछ हासिल कर चुके हों, तब भी विनम्र बने रहें।

जब किसी इमारत या होटल, कंपनी में प्रवेश करें, तो पहले व्यक्ति दरबान से लेकर कंपनी के एमडी तक सबके साथ उसी एक-सी विनम्रता से पेश आएं। अगर आप बड़ों का सम्मान नहीं करते, तो जिंदगी में कभी भी सफल नहीं हो सकते। मुश्किल परिस्थितियों से घबराइए मत। हर कोई मुश्किलों का सामना करता है, लेकिन उस दौरान अगर आप मुस्कुराते रहते हैं, तो सफल होने वाले चुनिंदा लोगों में शामिल हो जाते हैं। मैं अभी तक कड़ी मेहनत का विकल्प खोज रहा हूं लेकिन मिला नहीं है। आप भी कड़ी मेहनतं करते रहिए, सफलता जरूर मिलेगी।

दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की अपको Success Story In Hindi कैसी लगी ?

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