September 24, 2022
Self Confidence In Hindi.

ये 3 बातें जो आपका आत्मविश्वास बढ़ा देंगी । Self Confidence In Hindi

Self Confidence In Hindi

सपने देखने की इच्छा जगाइए, साकार करने की कल्पना करिए –

19 वी सदी के मध्य में अमेरिकी कवि और दार्शनिक हेनरी डेविड थोरू ने सफलता की परिभाषा का जिक्र किया था। वह कहते थे, ‘अगर कोई शख्स अपने सपनों की दिशा में पूरे आत्मविश्वास के साथ बढ़ता जाता है और अपनी सोच या कल्पना के मुताबिक जीवन जीने का प्रयास करता है तो यह तय है कि उसे जल्दी सफलता मिलनी ही है। मैंने थोरू की दी हुई परिभाषा में से दो शब्दों को अलग तरीके से लिखा है- सपने और कल्पना।

सपने देखने की इच्छा जगाइए और कल्पना कीजिए कि आप यह सब कैसे हासिल करेंगे, जो आपने सोच रखा है। अगर आप उन कल्पनाओं के अनुसार जीते हैं, तो पूरी कायनात आपकी इच्छा को पूरा करने में जुट जाएगी। स्वस्थ कल्पनाओं के लिए कुछ नियम बनाएं। पहला तो अपनी कल्पना में उसे बिल्कुल जगह न दें, जिसे आप हासिल नहीं करना चाहते या आपकी आत्मा ऐसा करने को तैयार न हो।

दूसरा नियम है कि आपको खुद की ताकत पर इस कदर भरोसा करना होगा कि आप गैर मौजूदा को हकीकत में बदल सकते हैं। कल्पनाशीलता को मारने का परिणाम यह होगा कि आज आप जहां हैं, जीवन भर वहीं रह जाएंगे। तीसरा नियम यह है कि अपने लिए एक मजबूत सचेतक तलाशना होगा, जो कि आपको समय-समय पर याद दिलाए कि आपकी कल्पना केवल आपकी अपनी है। इसमें किसी और का दखल नहीं हो सकता।

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तुलना सिर्फ दुख ही नहीं देती खुशी का रास्ता भी है –

जब हम अपने वर्तमान को अतीत से तोलते हैं। और अगर बेहतर स्थिति में पाते हैं, तो खुशी मिलती है। उदाहरण के लिए अगर आय में दस हजार की बढ़ोतरी हो जाए तो खुशी होगी। लेकिन जल्द ही हम इसके आदी हो जाएंगे और ये खुशी का कारण नहीं रह पाएगी। हम दूसरों से खुद की तुलना करते हैं। कितना भी कमाएं, लेकिन यदि हमारा पड़ोसी हमसे ज्यादा कमाता है तो हम असंतुष्ट महसूस करने लगते हैं। हमारी खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपनी तुलना किसके साथ करते हैं।

निश्चित ही, आय के अतिरिक्त अन्य बातों की भी तुलना करते हैं। अपने से अधिक चतुर, सुंदर या सफल लोगों के साथ लगातार तुलना करने से हमारे भीतर इर्ष, कुंठा और दुख पैदा होने लगता है। परंतु हम इसी सिद्धांत का सकारात्मक तरीके से भी प्रयोग कर सकते हैं। अपनी तुलना स्वयं से कम भाग्यशाली लोगों के साथ करके और हमारे पास जो कुछ है, उसके विषय में विचार करके अपने आत्म-संतोष के भाव को बढ़ा सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने यह दर्शने के लिए अनेक प्रयोग किए हैं कि जीवन में संतोष के स्तर को बढ़ाने के लिए हमें सिर्फ अपने दृष्टिकोण को बदलने और यह सोचने की जरूरत है कि हमारी स्थिति इससे भी बुरी हो सकती थी। न्यूयॉक के स्टेट विश्वविद्यालय में एक प्रयोग के दौरान कुछ लोगों को इस वाक्य को पूरा करने के लिए कहा गया, ‘मुझे खुशी है कि मैं…नहीं हु’ इस अभ्यास को पांच बार दोहराने के बाद लोगों में जीवन के प्रति संतोष का भाव काफी बढ़ गया। प्रयोगकर्ताओं ने एक अन्य समूह को एक दूसरा वाक्य पूरा करने के लिए दिया- ‘काश मैं होता।’ इस बार लोगों में जीवन के प्रति असंतोष का भाव अधिक था।

नेक कोशिशों से अच्छी आदतों का भी नशा हो जाता है –

नशा सिर्फ नकारात्मक संधर्भो में ही न समझें। अच्छी आदतें जब नशा बन जाएं तब जीवन का आनद कई गुना बढ़ जाता है। सकारात्मकता से भरी अच्छी आदतें कुछ लोगों के लिए स्वप्न की तरह होती हैं। वहीं कुछ लोगों के लिए ये सहज होती हैं। बिल्कुल रोजमर्गा की जिंदगी का हिस्सा। विलियम ग्लासर नाम के विख्यात लेखक ने ‘पॉजिटिव एडिवशन’ यानी सकारात्मक लत शब्द पहली बार इस्तेमाल किया था। गलासर ने बताया था कि सकारात्मक लत हमें अंदर से मजबूत करती हैं और जीवन को संतोषप्रद बनाती हैं। किसी गतिविधि की सकारात्मक लत बनाने के लिए आपको ये छह मापदड पूरे करने होंगे।

1. ये कोई ऐेसी चीज होना चाहिए, जिसमें आपको किसी से प्रतिस्पर्धा न करनी पड़े और आप दिन का लगभग एक घंटा उस काम के लिए समर्पित कर सकें।

2. उस काम को अंजाम देना आपके लिए बेहद आसान हो और उसे करने के लिए दिमागी रूप से कोई खास प्रयास न करना पड़े।

3. आप इसे दूसरों के साथ या अकेले भी कर सकें। लेकिन इसके लिए दूसरों पर निर्भर बिल्कुल न होना पड़े।

4. आप मानते हैं कि इसका कुछ मूल्य (शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक) है। आप को यकीन होना चाहिए कि यदि आप इस पर कायम रहते हैं तो खुद में सुधार करेंगे। लेकिन यह पूरी तरह से सब्जेक्टिव मामला है। सुधार भी मापने योग्य होना चाहिए।

5. गतिविधि ऐसी होना चाहिए जो आप अपनी आलोचना किए बिना कर सकें। यदि इस दौरान अपने आप को स्वीकार नहीं कर सकते हैं, तो गतिविधि की आदत नहीं पड़ेगी।

दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की अपको ‘ अनुभवों को भीतर जन्म दे ‘ आर्टिकल आपको कैसा लगे ?

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