September 24, 2022
Prem Chand Biography In Hindi

मुंशी प्रेमचंद की संपूर्ण जीवनी । Prem Chand Biography In Hindi

Prem Chand Biography In Hindi मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू के एक महान लेखक थे। जिन्हें अमूमन नवाब राय के नाम से भी जाना जाता था। उपन्यास के क्षेत्र में उनकी योग्यता इतनी विशाल और तीव्र थी की बंगाल के एक प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास का सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद जी ने कहानी संग्रह और उपन्यास की एक ऐसी सभ्यता विकसित की थी। जिसने पूरी सदी के लिए साहित्य का मार्गदर्शन खोल कर रख दिया।

उन्होंने हिंदी साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की एक मजबूत नींव रखी। हमें यह मानने में कदापि संकोच नहीं करना चाहिए कि उनके लेखन हिंदी साहित्य के ऐसे पहलू हैं जिनके बिना हिंदी साहित्य का अध्ययन अधूरा होगा। 20वीं सदी के अंत में जब हिंदी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उस समय प्रेमचंद जी ने इसमें अहम भूमिका निभाकर हिंदी की त्रुटियों को हटाने में अपना अहम योगदान निभाया था। उनके इस योगदान को आज भी अतुलनीय माना जाता है।

कठिन संघर्षों का सामना करते हुए मुंशी प्रेमचंद जी ने सरल सहज हिंदी को साहित्य प्रदान किया और इस खूबसूरत विषय में अपनी संपूर्ण और भावनात्मक छाप छोड़ी। प्रेमचंद जी हिंदी लेखक के साथ – साथ एक महान साहित्यकार, नाटककार और उपन्यासकार जैसी अनेक प्रतिभा के धनी थे।

मुंशी प्रेमचंद की संपूर्ण जीवनी । Prem Chand Biography In Hindi

नामधनपत राय श्रीवास्तव उर्फ़ नवाब राय उर्फ़ मुंशी प्रेमचंद
जन्म तारीख31 जुलाई 1880
जन्म स्थानलम्ही, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
पिता का नामअजैब राय
माता का नामआनंदी देवी
शिक्षाअंग्रेजी साहित्य, फारसी और इतिहास में बीए
व्यवसायअध्यापक, लेखक, पत्रकार
उल्लेखनीय कार्यगोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन, निर्मला और मानसरोवर
मृत्यु8 अक्टूबर, 1936 वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत

मुंशी प्रेमचंद जी का प्रारंभिक जीवन – Prem Chand Personal Life Details

मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के एक छोटे से गांव लम्ही में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके दादाजी का नाम गुर सहाय राय था जो पेशे से एक पटवारी थे और पिताजी अजैब राय पेशे से एक पोस्ट मास्टर थे। प्रेमचंद जी का बचपन काफी कड़े संघर्षों में बिता। जब वे केवल 8 वर्ष के थे एक गंभीर बीमारी के चलते उनकी मां का देहांत हो गया। इस छोटी सी उम्र में मां के देहांत से प्रेमचंद जी के जीवन से प्यार – प्रेम मानो छिन सा गया हो।

पिता का तबादला सरकारी नौकरी के चलते गौरखपुर में हो गया जहां उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली। सौतेली मां से प्रेमचंद जी को कभी भी मां का प्रेम प्राप्त नहीं हुआ। बचपन से ही उनका हिंदी के प्रति एक अलग रुझान था, जिसने उनके सामने आगे चलकर सफलता के अनेक रास्ते खोल दिए। एक दिन उन्होंने स्वयं प्रयास करके एक छोटे से स्वरचित उपन्यास से इसकी शुरुआत की।

अब वे प्रतिदिन छोटे-छोटे नए उपन्यास पढ़ने लगे थे। अपनी पढ़ाई की रुचि के साथ आर्थिक मंदी के चलते उन्होंने थोक व्यापारी के यहां काम करना प्रारंभ कर दिया। अपनी मेहनत की कमाई से वे अधिकतर हिंदी उपन्यास पढ़ने के अपने शौक को पूरा करते रहे।

प्रेमचंद जी स्वभाव से एक सरल, सहज और दयालु व्यक्ति थे। किसी भी मुद्दे पर बहस करना उन्हें लाजमी नहीं लगता था। वे अपना वक्त शांतिपूर्ण तरीके
और दूसरों की मदद करने में बिताते थे। ईश्वर भक्ति में विश्वास करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए वे एक वकील के पास ₹5 मासिक वेतन पर नौकरी करने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को हिंदी साहित्य में इतना पारंगत बना लिया की उन्हें एक से एक बेहतर नौकरी के आमंत्रण आने लगे और आखिरकार वे एक मिशनरी स्कूल के प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त हो गए।

हंसते-हंसते मुंशी प्रेमचंद जी ने अपने जीवन के हर संघर्ष का सामना किया और पूरे विश्व के सामने एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व के रूप में उभरे।

मुंशी प्रेमचंद की शिक्षा – Education of Prem Chand

प्रेमचंद जी की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा सात साल की उम्र में उन्हीं के गांव लम्ही के एक छोटे मदरसे से शुरू हुई। मदरसे में उन्हें हिंदी के साथ – साथ उर्दू भाषा और थोड़ी बहुत अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान हो गया। प्रेमचंद जी जब केवल आठ वर्ष के थे तब उनकी मां का देहांत हो गया, सौतेली मां से उन्हें कभी वैसा प्यार नहीं मिला, पिता हमेशा नौकरी में व्यस्त रहते थे, तो ऐसा करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी शिक्षा को अपने बल पर ही आगे बढ़ाया।

और आगे अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए बनारस के कॉलेज में एडमिशन लिया। किंतु आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।वे बड़े ही मुश्किल हालात में अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी कर पाए थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन के संघर्षो के आगे कभी हार नहीं मानी, खुद को आर्थिक रूप से मजबूत किया और 1919 में दोबारा अपनी पढ़ाई आरंभ की और इस बार बीए की डिग्री हासिल की।

मुंशी प्रेमचंद का विवाह – Prem Chand’s Marriage

प्रेमचंद जी बचपन से ही अपने जीवन के मुश्किल हालातों से लड़ रहे थे। परिवार का साथ और प्यार उन्हें कभी नसीब ही नहीं हो पाया। पुराने रीति – रिवाजो और संस्कृति के चलते पिता के दबाव में उन्होंने पंद्रह साल की बेहद कम उम्र में ही शादी कर ली। विवाह उनकी सहमति के बिना एक ऐसी कन्या से किया गया था जो स्वभाव से बहुत ही झगड़ालू किस्म की लड़की थी। प्रेमचंद जी के विवाह के कुछ दिन पश्चात ही उनके पिताजी का भी देहांत हो गया। अब परिवार का सारा बोझ प्रेमचंद जी के कंधों पर आ गया।

कई बार ऐसा भी समय आया जब उन्हें नौकरी करने के बाद भी अपना कीमती सामान बेचकर घर की जरूरतों को पूरा करना होता था। उस छोटी सी उम्र में गृहस्ती का सारा बोझ प्रेमचंद जी पर आ गया। यही कारण था वा प्रेमचंद्र जी की अपनी पत्नी से बिल्कुल भी नहीं बनती थी। कुछ समय पश्चात विवादों के चलते दोनों का तलाक हो गया और फिर लगभग पच्चीस वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना दूसरा विवाह एक विधवा महिला से किया। इनकी दूसरी शादी बेहद सफल रही।

और भाग्य ने ऐसी पल्टी मारी की उसके बाद उनकी दिन-ब-दिन तरक्की होती गई।

मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध पुस्तकें – Famous Books of Premchand

गोदान1936
कर्मभूमि1932
निर्मला1925
कायाकल्प1927
रंगभूमि1925
सेवासदन1918
गबन1928

प्रेमचंद जी की मृत्यु – Death Of Prem Chand

शरीर में लंबी बीमारियों के चलते प्रेमचंद की 8 अक्टूबर 1936 को मृत्यु हो गई।

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