September 24, 2022
Positive Thoughts In Hindi.

लंबे जीवन का रहस्य है सकारात्मकता । Positive Thoughts In Hindi

Positive Thoughts In Hindi

सकारात्मक सोच के कई फायदे हैं, जैसे यह स्वास्थ्य बेहतर रखती है, दिल के रोगों की आशंका कम करती है। अब कई शोध यह भी साबित कर चुके हैं कि सकारात्मक सोच हमारी उम्र बढ़ा सकती है। दुनिया में हुए कई शोध के मुताबिक सकारात्मकता हमारी शारीरिक और मानिसक सेहत से जुड़े पहलुओं को तो प्रभावित करती ही है, यह आर्थिक पहलुओं पर भी असर डाल सकती है, खासतौर पर गरीबी की स्थिति में। शोध बताते हैं कि सकारत्मक सोच में व्यक्ति का पेशेवर प्रदर्शन सुधारने और आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की शक्ति मौजूद है। जानिए रिसर्च सकारात्मकता और लंबी उम्र के संबंध के बारे में क्या कहती हैं।

1. शोध बताते हैं कि आप अपनी उम्र बढ़ने को लेकर क्या दृष्टिकोण रखते हैं, इसका असर इसपर भी पड़ता है कि आप कितना लंबा जिएंगे। अमेरिका के नेशनल एकेडमी ऑफ साईंसेस में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक सकारात्मक सोच से किसी व्यक्ति की उम्र 11 फीसदी से 15 फीसदी तक बढ़ सकती है। साथ ही ऐसी सोच रखने वाले व्यक्तियों की उम्र 85 वर्ष या उससे अधिक रहने की संभावना भी ज्यादा होती है। वर्ष 2019 में हुए इस अध्ययन के मुताबिक अगर व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहे है, उसे ज्यादा आर्थिक परेशानियां न हों और वह अपनी मानसिक सेहत को बेहतर बनाए रखे तो सकारात्मक सोच और बेहतर नतीजे दे सकती है।

2. सकारात्मक सोच से व्यक्ति की जीने की इच्छा बढ़ती है, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग द्वारा वर्ष 2018 में किया गया एक अध्ययन बताता है कि जो लोग अपनी बढ़ती उम्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं और उम्र बढ़ने को लेकर दुःखी नहीं होते, उनके ज्यादा लंबा जीने की संभावना रहती है। ऐसा तब होता है, जब आप बढ़ती उम्र के बारे में अपने मत को युवा रहते हुए ही सकारात्मक बना लेते हैं। आप अगर उम्र के बढ़ने को जीवन खत्म होने या नकारात्मक बदलाव होने से नहीं जोड़ते हैं, बल्कि पूरे जीवन को भरपूर जीने और खुश रहने की सोच के साथ जीते हैं, तो आपके ज्यादा जीने की संभावनों में भी इजाफा होता है।

Positive Thoughts In Hindi.

3. ऐसे लोगों को पहचानें, जिनका योगदान आपके जीवन में महत्वपूर्ण है, विशेषज्ञ मानते हैं कि पॉजिटिव सोच से लंबा जीवन पाना चाहते हैं तो आपको कम उम्र से ही इस दिशा में काम करना चाहिए। उनसे जुड़े रहें और समय – समय पर आभार व्यक्त करना न भूलें। इसके अलावा अपने आस-पास सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों की कमी न होने दें।

4. सकारात्मक सोच में व्यक्ति का पेशेवर प्रदर्शन सुधारने और आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की शक्ति मौजूद है, दुनिया में हुए कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि सकारात्मकता हमारी शारीरिक और मानिसक सेहत से जुड़े पहलुओं को तो प्रभावित करती ही है, यह आर्थिक पहलुओं पर भी असर डाल सकती है, खासतौर पर गरीबी की स्थिति में।

5. प्रतिभागियों की मानसिक सेहत में भी सुधार, साल 2015 में इनोवेशन फॉर पॉवर्टी एक्शन ने भारत समेत 6 देशों में उम्मीद और सकारात्मकता का गरीबी पर असर को लेकर एक अध्ययन किया। इसके तहत 21,000 लोगों को गरीबी से निकालने का कार्यक्रम बनाया गया। इसमें परिवारों को गाय, भेड़-बकरी या मधुमक्खियां दी गई।

साथ ही उनसे लगातार संपर्क कर सकारात्मक और उम्मीद से जुड़ी बातें साझा की गई कि वे कुछ कर सकते हैं और गरीबी से बाहर निकल सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में पाया गया कि इससे गरीब नए काम और नौकरियां करने के लिए प्रेरित हुए। उन्होंने ज्यादा मेहतन की और अपनी बचत को भी बढ़ाया। और उनमें जो आर्थिक निवेश किया गया उसमें भारी रिटर्न मिला। भारत में तो 443% रिटर्न मिला।

Positive Thoughts In Hindi.

6. खुद से कहना होगा कि आप सफलता हासिल कर सकते हैं, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अर्थशास्त्री एस्थर डफलो के मुताबिक, गरीबी का सकारात्मक भावनाओं से सीधा संबंध है। वे कहते हैं कि गरीबी से तनाव होता है, उम्मीद कम होती है। और तनाव तथा उम्मीद की कमी से गरीबी होती है। इसलिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए साधनों के अलावा सकारात्मक सोच और उम्मीद होना जरूरी है। इसके लिए खुद को प्रेरित करना होगा।

7. सकारात्मक महसूस करने के लिए प्रेरणा जरूरी है, यह प्रेरणा किसी किताब, किसी लेख या किसी फिल्म से भी मिल सकती है। शोध बताते हैं कि इस सकारात्मक प्रेरणा का असर बचत की आदतों पर। पड़ सकता है। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ता इधथियोपिया में एक समूह को प्रेरक वीडियो दिखाते रहे, जबकि दूसरे समूह को कॉमेडी सीरियल दिखाए गए। फिर 6 महीने तक उन लोगों के अध्ययन में पाया कि कॉमेडी सीरियल देखने वालों की तुलना में प्रेरक वीडियो देखने वालों ने ज्यादा बचत की और बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा खर्च किया। इसी तरह युगांडा में हुए एक अध्ययन में बच्चों को जब अच्छा महसूस कराने वाली फिल्में दिखाई गई, तो उनका अकादमिक प्रदर्शन बेहतर हुआ।

अत: – ‘ अपनी ऊर्जा का स्त्रोत ढूंढिए, इसे सही जगह लगाइए, आपकी सफलता तय है ‘

दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की सकारात्मकता पर यह आर्टिकल आपको कैसा लगा ? ताकि हम ऐसे ही ओर प्रेरणादायक आर्टिकल आपके लिए प्रकाशित करते रहें।

इसे भी पड़े

अच्छा करने वालों की मदद करना आशावाद है

Leave a Reply

Your email address will not be published.