September 24, 2022
Positive Attitude In Hindi

सही एटीट्यूड ही आपकी ताकत है । Positive Attitude In Hindi

Positive Attitude In Hindi

जिंदगी में कुछ हासिल करने की इच्छा हम सबके मन में होती है। हमें जीवन में समृद्धि, लगातार प्रगति चाहिए। कुछ दशकों पहले कुछ विचारकों ने इकडे होकर सफल-असफल लोगों के जीवन का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जीवन में संसाधन, सपोर्ट सिस्टम अच्छा नहीं होने के बावजूद लोग सफल हुए हैं। वहीं इनकी प्रचुरता के बाद भी कुछ लोग असफल हुए हैं। जवाब मिला कि संसाधनों के अलावा भी कोई कारण है, जिसकी वजह से जीवन में प्रभाव पड़ता है। वो था लोगों का एटीट्यूड और जीवन के विचार।

प्रसिद्ध लेखक जैफ केलर ने किताब लिखी है ‘एटीट्यूड इज्ञ एवरीथिंग।’ वह कहते हैं कि सफलता दिमाग में शुरू होती है। इसलिए अपने विचार सही रखें। दूसरा वह कहते हैं कि आपके शब्द आपका चरित्र और व्यक्तित्व निर्धारित करते हैं। इसलिए सोच-समझकर बोलें। तीसरा ये कि आपके कामों से ही परिणाम तय होता है, इसलिए उद्देश्यपूर्ण काम कें। असफलता का सामना करने में सिर्फ एटीटूयूड ही आपका हथियार होता है। जीवन में ऐसी मुश्किल परिस्थितियां भी आएंगी, जब फोन की कॉ्टैक्ट लिस्ट में 400 नंबर होने के बावजूद आप यह निर्णय लेने से पहले तकलीफ में आ जाएंगे कि किसे फोन करें और किसे नहीं।

Positive Attitude In Hindi.

जीवन में सुख भी आएगा, दुख भी आएगा। ये परिवर्तनशील जगत है। यहां कोई चीज भी स्थाई नहीं है, सिवाय परिवर्तन के। उस समय परिस्थितियों को संभाल लेना इंसान का कर्तव्य है और यही जीवन जीने की शैली है। आपके साथ जो कुछ भी घट रहा है, वह हमेशा अच्छा है। अगर आप इस विचार को अपने साथ रखेंगे तो उस गंभीर परिस्थिति से जल्दी बाहर निकल आएंगे। बैठ जाना है या चलते जाना है, यह आपका विकल्प है। कठिन परिस्थितियों में खुद को, परिवार को, नौकरी-व्यवसाय को कितनी अच्छी तरह संभाला…यही आपको सही इंसान बनाता है, यही जीवन जीने की अच्छी शैली है।

अमेरिका में कई वैज्ञानिकों ने एक आकलन के मुताबिक यह बात कही कि अगर मृत इंसानी शरीर भी बनाएं, तो इसमें 5 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आएगा। हमारी शरीर बहुत बड़ी अमानत है। हमारा हर सेकंड करोड़ों का है। हमें सोच पवकी करनी होगी कि शरीर के रूप में हमारे पास बहुत अमूल्य चीज है। आप एक सामान्य-सा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेते हैं, तो उसका यूजर मैन्युअल होता है। लेकिन हम अपने जीवन में दूढृतापूर्वक कोई कदम नहीं उठाए। जब यह विचार मन में घर कर जाएगा, तब ही प्रोग्रेस और सक्सेस की यात्रा शुरू होगी।

इसमे सबस पहला कदम है कि जीवन में कोई संकल्प तय करें कि करना क्या है। हाथ में पैन लें, सोने से पहले कुछ लिखिं कि मुझे क्या करना है। और जहां रोज उठते-बैठते हैं, वहां इसे चिपका दें। इससे यह आंखों के सामने रहेगा। अमेरिका में जॉन गोडार्ड नाम के ऐडवेंचरर थे। 14-15 साल की उम्र में उन्होंने अपने सपने और लक्ष्य एक कागज पर लिख लिए। ‘एवरेस्ट पर जाना है। नील नदी तैरकर पार करनी है आदि।’ ऐसे करते-करते उन्होंने जीवन के 57 लक्ष्य लिख लिए। 60 साल की उम्र में उन्होंने वह लक्ष्य वाला पृष्ठ खोलकर पढ़ा।

उसमें उन्होंने चैक करना शुरू किया कि कितने काम पूरे हो चुके हैं। वो देखकर चौंक गए कि 57 में से 55 टास्क पूरे ही गए हैं। सपन तो सब देखते हैं, लेकिन उसके पीछे बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सामान्य पुरुषार्थ से इंसान् सामान्य बना रहता है, लेकिन अगर प्रयत्न बढ़कर किए जाएं तो सामान्य व्यक्ति भी महान बन सकता है।

‘मैं और मेरा’ ईगो की निशानी है – अगर आप कहें कि प्रकाश की गति ध्वनि से तेज है और कोई इसके विपरीत बात करे, तो जाहिर है आप सही हैं। पर आप वाक्य में जोड़ दें कि मेरा यकीन करो या तुम मेरी बात का भरोसा क्यों नहीं करते। तो इसमें ईगो बीच में आ गया है। इस वाक्य में मैं या मेरा जोड़ने से भ्रम या गलफहमियां पैदा हो ग हैं। इोे में लोग हर चीज को अपने ऊपर लेते हैं। सच को किसी कवच की जरूरत नहीं। आप खुद से पूछें कि आप अपना बचाव कर रहे हैं या अपने भ्रम-गलतफहमियों का बचाव कर रहे हैं?

फिर खुशी पाने का तरीका क्या है – ‘हमारी पूर्व धारणाएं, सच्चाई से कोसों दूर बिंना जांचे-परखे विचार… ईगो यही कहानियां बनाता है और हमें यह मानने पर मजबूर कर देता है कि हम इस समय खुश नहीं रह सकते। ईगो कहता है कि अगर फलां चीज उस हिसाब से होती है, तो भविष्य में किसी क्षण हम जरूर खुश होंगे। या कहेगा कि चूंकि पहले ऐसा हो चुका है, इसलिए अभी तुम्हें खुश होने का अधिकार नहीं है। तो खुश कैसे हों ? जवाब है वर्तमान क्षण में पूरी तह होकर।

काम पर ध्यान देते हैं या खुद पर? – अधिकांश लोगों के जीवन में यादगार क्षण तभी पैदा होते हैं, जब वे किसी भी ईगो से पूरी तरह मुक्त होते हैं। काम में पूरी तरह मौजूद लोगों का दफ्तर आध्यात्मिक जगह बन जाता है। भले ही उन्हें इसका अहसास न हो। ऐसे लोगों का प्रभाव उनके काम के भी परे होता है। वहीं काम में अच्छे होने के बावजूद भी कुछ लोगों का अहंकार उनके काम में बाधा डालता है। उनका काम में कम और खुद पर ज्यादा ध्यान होता है। लोग जब खुद क्रेडिट लेने पर आते हैं, तो काम प्रभावित होने लगता है।

आप और अच्छे हो सकते है – ‘आप कैसे हैं?’ ‘अच्छे हैं’ क्या और अच्छे हो सकते थे? कई मामलों में लोग खुश होने का दिखावा करते हैं, पर गहरे दुख में भी हो सकते हैं। अप्रसन्नता को पहचाननन जरूरी है। ये मत कहें कि मैं खुश नहीं हूं। यह कहें कि मेरे अंदर खुशी नहीं है और फिर इसके कारणों की पड़ताल करें। अगर तुरंत बदलाव मुमकिन नहीं तो इसे स्वीकार करें और कहें ‘फलहाल कुछ नहीं हो सकता, लेकिन आगे हालात ठीक होंगे।

हम आशा करते हैं कि “सही एटीट्यूड ही आपकी ताकत है” आर्टिकल आपको पसंद आया होंगा। जिससे आपको अपना एटीट्यूड बदलने और अपनी सफलता प्राप्त करने में सहयोग मिलेंगा। दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की Positive Attitude In Hindi आर्टिकल आपको कैसा लगा ? ताकि ऐसे ही ओर आर्टिकल हम आपके लिए प्रकाशित करते रहे।

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