September 24, 2022
Personality Development In Hindi.

अपना व्यक्तित्व विकास कैसे करें । Personality Development In Hindi

Personality Development In Hindi

दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस आर्टिकल Personality Development In Hindi में। इस आर्टिकल में हम मनुष्य के व्यक्तित्व विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देंगे क्योंकी दोस्तों दुनिया में कोई काम कठिन नहीं होता। हमारी नासमझी के कारण वह कठिन लगने लगता है,या हम अपनी आदतों से उसे कठिन बना लेते हैं। चुंकि कोरोना के बाद बहुत कुछ बदला बदला है, तो कई लोगों को ऐसा लग रहा है कि लाइफ टफ हो गई, अब फिर से वैसा ही सब कुछ मिलना मुश्किल है। लेकिन, यह भी गलतफहमी है।

ध्यान रखिएगा, यदि काम को सरलता से करेंगे तो वह सरल हो जाएगा। इसलिए इस बदले हुए दौर में आदत बनाइए हर काम शांति से, सरलता से करेंगे। शांति प्राप्त कर लेना किसी के लिए नामुमकिन नहीं है। कई लोगों को लगता है अब शांत होना बड़ा कठिन हो गया है। हां, पैसा-सुविधाएं मिल जाएं तो शांत हो जाएंगे। ऐसा नहीं है। अमीर लोग शांत भी हों, यह जरूरी नहीं। शांति प्राप्त करना इतना सरल है कि चाहे तो दुनिया का हर इंसान आसानी से प्राप्त कर सकता है। बस, मुद्दा यह है कि उसकी तैयारी कैसे की जाए।

इसके लिए सिर्फ अपने भीतर मुड़ने की तैयारी करना है। जैसे पानी उबलकर भाप बन जाता है, एक कली फूल बन जाती है, जैसे चिड़िया पंख फैलाकर उड़ जाती है। ये सब सहज और सरल क्रियाएं हैं, जो होती ही हैं। ठीक ऐसा ही शांति को प्राप्त करना है। इस समय हम सबका पहला प्रयास होना चाहिए स्वस्थ रहना। जितना शांत होकर काम करेंगे, उतने ही स्वस्थ रहेंगे, शांत रहेंगे। अगर आप भी अपना व्यक्तित्व विकास करना चाहते है तो इस आर्टिकल को एक बार पूरा जरूर पढ़े।

Personality Development In Hindi.

रचनात्मकता बढ़ाने के चार वैज्ञानिक तरीके –

किसी की रचनात्मकता उसकी अंदरुनी समझ, अंतर्दृष्ट या इनसाइट पर निर्भर करती है। किसी जोक पर कोई खिलखिलाकर हंसता है, तो किसी के पल्ले ही नहीं पड़ता। क्या रचनात्मकता को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की तरह हैक किया जा सकता है, जवाब हैं हां..पढ़िए कैसे…

लोग जीवन में खुशी की तलाश में रहते हैं। खुशी को अलग-अलग तरीकों से ढूंढते हैं। तो क्या खुशी का कोई फॉर्मूला होता है, जिससे इसे पाया जा सके। क्या हम वास्तव में जानते भी हैं कि खुशी क्या है ? दरअसल अपनी खुशी का चुनाव हम स्वयं करते हैं। खुशी के बारे में विज्ञान, मेडीकल साईंस और आध्यात्म की अपनी-अपनी राय है। हमारे देश में योग व ध्यान जैसे तरीके हैं, जो हमारी चेतना को प्रभावित कर हमें खुशी का अलग अनुभव दे सकते हैं।

1. खुद को पहचाने.. खुशी का फॉर्मूला होता है और हम खुश रहने का चुनाव कर सकते हैं। खुशी का अर्थ सिर्फ आनंद पाना नहीं है। सच्ची खुशी के लिए आध्यात्मिक यात्रा जरूरी है, खुद की सही पहचान जानना जरूरी है कि आप वास्तव में कौन हैं।

2. ठहराव की लत न हो.. मन सिर्फ दिमाग में नहीं होता, यह पूरे शरीर में है। हम हमेशा कुछ बनने की प्रक्रिया में रहते हैं। शरीर अस्थिरता की स्थिति में रहता है। पीड़ा तब होती है जब अस्थिरता की स्थिति में भी ठहराव की आदत या लत हो जाती है।

3. खुद को आप ही बदल सकत है..अंतिम सत्य यह है कि सब कुछ आप ही के हाथ में है। आप स्वयं को बदल सकते हैं। आप आज में जीकर समय के साथ अपना रिश्ता बदल सकते हैं और ध्यान के जरिए अपनी बायोलॉजी को बदल सकते हैं।

4. सोच का पैटर्न बदलें… सवालों को जिएं और जिंदगी आपको जवाबों की ओर ले जाएगी। हम सभी एक ही अलौकिक चेतना का हिस्सा हैं।

अंदर से आजाद रहना जरूरी –

चीजों को साधारण रखें, उन्हें बेवजह जटिल बनाने की कोशिश न करें। हर मामले को विस्तार से समझाने से बचे, इससे सुने-पढ़ने वाले आपसे दूर होंगे। खुद को कभी कमतर न आंकें। अपनी क्षमताएं पहचाने, सपना पहचानें और फिर उस दिशा में आगे बढ़े। इससे आपको आपका काम, काम नहीं लगेगा। लेकिन काम में अनुशासन फिर भी जरूरी होगा। तभी सफलता मिल पाएगी। लोगों का जीवन पढ़ने की कोशिश करें, इससे आपको दुनिया की बेहतर समझ होगी और आप खुशी भी महसूस करेंगे।

1. सपने वाला काम… जब आप वही कर रहे होते हैं, जिसे करने का आपने हमेशा सपना देखा था, तो फिर वह किसी काम की तरह नहीं लगता। वह सही मायनों में जीवन जीने जैसा लगता है। जिसमें आपको मजा आता है, जिससे आप खुलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभा पाते हैं।

2. अनुशासन जरूरी… बिना प्रिर्याप्त अनुशासन के आगे नहीं बढ़ा जा सकता। अनुशासन से ही कई लेखक किताबें लिख पाए। साथ ही प्रेरित महसूस करते रहना भी जरूरी है। अगर कुछ करते समय प्रेरित महसूस नहीं करते है तो उसे छोड़ आगे बढें।

3. बहुत सफाई न दें.. अपनी आत्मा को किसी से साझा न करें, उसे मुक्त रखें। कभी किसी की तारीफ सिर्फ इसलिए न करें क्योंकि आप पर ऐसा करने का दबाव है। ऐसे आलोचकों को जवाब देने में अपनी ऊर्जा खर्च न करें, जो आपको पीछे खींचना चाहते हैं। चीजें जरूरत से ज्यादा न समझाएं।

4. फॉर्मूलों में न बंधें.. अगर आप वाकई ईमानदार हैं, आप किसी फॉर्मूले पर चलने का प्रयास नहीं करते हैं, तो आप आजाद होते हैं। कुछ भी करने के लिए, कुछ भी लिखने के लिए। खुद को यूं आजाद रखना ही आपको सफलता दिलाता है।

स्वीकार करें और इन तीन शब्दों से खुद को समय दें –

स्वीकार करना अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की एक रणनीति है। यह उस क्षण के बारे में है, जहां आप परिस्थिति पर ओके कह देते हैं। लोगों को हम अधिकतर तीन चीजें कहते सुनते है- ‘ओके, तो क्या, आगे क्या’ ओके कहकर आप बात को बिना जज किए उसी क्षण रोक देते हैं। फिर आप अपनी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को स्वीकार करने के लिए खुद को समय देते हैं।

एक बार जब उस घटना को समय हो जाता है, तो खुद से पूछ सकते हैं कि ‘तो क्या? यह उस घटना के बारे में सही तरीके से स्वीकार करने का मौका देता है। और इसके बाद ‘आगे क्या’ की ओर बढ़कर आपके पास उस घटना के संबंध में निर्णय लेने से संबंधित सारी जानकारी होती है। इस अभ्यास से आप अपने मूड को दूसरे के हिसाब से बनने-बिगड़ने से रोक सकते हैं।

दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की अपको ‘ व्यक्तित्व विकास कैसे करें ‘ आर्टिकल आपको कैसा लगे ?

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