September 24, 2022
Motivation Speech In Hindi.

अच्छा करने वालों की मदद करना आशावाद है । Motivation Speech In Hindi

Motivation Speech In Hindi

आज शायद खबरें पढ़कर आप बहुत ज्यादा आशावादी महसूस नहीं करते होंगे । दुनियाभर में संकट है। कोई देश अछूता नहीं है। आपका दिल हर उस व्यक्ति के लिए दुःखी होता है, जिसे त्रासदी ने छुआ है। यहां तक कि वे लोग भी महसूस कर रहे हैं कि दुनिया बिखर रही है, जो खुशकिस्मती से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं हुए हैं। ऐसा लगता है जैसे समस्याओं का सैलाब आ गया है।

लेकिन ये घटनाक्रम कितने ही बुरे क्यों न हो, इनका अंत होगा और दुनिया में हमें फिर सकारात्मक रुझान नजर आएंगे। आप देखेंगे कि दुनिया कुलमिलाकर और बेहतर हो रही है। कोई ऐसी समस्या नहीं बनी, जो साथ में समाधान नहीं लाई हो। कुछ समाधान बाहर होते हैं, कुछ भीतर। यदि परेशानी का पूरा परिवार है, तो उम्मीद का भी अपना एक खानदान है। आस, भरोसा, आत्मविश्वास, हिम्मत, खुश रहने की आदत, सेवा का भाव, यह उम्मीद का घराना है।

Motivation Speech In Hindi.

भगवत में एक कथा है –

अजामिल नाम के व्यक्ति की मृत्यु पर जब उसे लेने यमदूत पहुंचे तो देवदूत उसे बचाने आ गए। तब देवदूतों ने यमदूतों से पूछा था- जब आप किसी को ले जाकर दंड देते हैं तो इसका कोई विधान भी है? यमदूतों ने दंड का विधान बताते हुए कहा था, मृत्यु को आदेश है कि जो आत्मविश्वास से भरा हो, उसे वह बहुत मान देगी। परेशानी कभी अकेली नहीं आती। एक पूरा परिवार साथ लेकर चलती हैं।

यह भोलेपन में कही गई कोई आशावादी बात नहीं है। इसके पीछे आंकड़े भी हैं। आप उन बच्चों की संख्या देखें जो अपना पांचवां जन्मदिन मनाने से पहले ही गुजर जाते हैं। वर्ष 1990 के बाद से ऐसे बच्चों की संख्या आधी रह गई है। इसका मतलब है कि 12.2 करोड़ बच्चों को एक तिहाई सदी में बचा लिया गया और अनगिनत परिवार अपने बच्चे को खोने के दुःख से बच गए।

और यह सिर्फ एक पैमाना है। वर्ष 1990 में दुनिया की एक तिहाई आबादी बेहद गरीबी में जीवन यापन कर रही थी। आज ऐसे लोग केवल 10 फीसदी हैं। महिलाएं अब राजनीतिक शाक्ति हासिल कर रही हैं और राष्ट्रीय संसदों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी है। दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा बच्चे प्राइमरी स्कूल में पढ़ पा रहे हैं। ऐसी कई अच्छी चीजें हुई हैं और हो रही हैं।

मैं मौजूदा स्थिति को कमतर नहीं आंक रहा। अभी बहुत काम बाकी है। आशावादी होने का मतलब यह नहीं है कि हम त्रासदी और अन्याय को नजरअंदाज कर दें। इसका मतलब है कि आप ऐसे लोगों को तलाशने के लिए प्रेरित हों, जो इन मोर्चो पर अच्छा काम कर रहे हैं और आप उनकी प्रगति को और व्यापक बनाने में मदद करें। आप लाखों लोगों की मौत से हैरान हैं, तो आप पूछें, उन्हें बचाने में महारत किसे हासिल है और आप उनकी ज्यादा मदद कैसे कर सकते हैं?’

ऐसा क्यों लगता है कि दुनिया लगातार टूट रही है?

मुझे लगता है कि इसका संबंध खबरों की प्रवृत्ति से है। बुरी खबर नाटकीयता के साथ तेजी से आती है, जबकि अच्छी खबर धीरे-धीरे बढ़ती है। और आमतौर पर खबर के लायक ही नहीं समझी जाती। आग की लपट्टं में घिरी एक बिल्डिंग के वीडियो पर बहुत व्यूज आते हैं, लेकिन ‘इस साल बहुत कम बिल्डिंग जली’ हेडलाइन वाली खबर पर। बहुत लोग क्लिक नहीं करते। यह मानव स्वभाव है। कि वह खतरे पर पहले ध्यान देता है। क्रमिक विकास ने हमें उन जानवरों से डरना सिखाया है, जो हमें खाना चाहते हैं।

हमारी सहिष्णुता में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है –

हमारे साथ होने वाली बुरी चीजों और उनके प्रति हमारी सहिष्णुता में भी लगातार अंतर बढ़ा है। कई सदियों में हिंसा नाटकीय रूप से कम हुई है और उसे स्वीकार करने की हमारी इच्छा भी कम हुई है। लेकिन यह सुधार उस गति से नहीं हुए, जितनी हम उम्मीद करते हैं, इसलिए ऐसा लग सकता है कि हालात
और खराब हो रहे हैं। एक हद तक यह ठीक भी है कि बुरी खबरें ध्यान खींचती हैं। अगर आप दुनिया को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आपके पास कुछ ऐेसा होना भी जरूरी है, जिस पर आपको गुस्सा आए। लेकिन इसका

अच्छाई के साथ संतुलन बनाना भी जरूरी –

अच्छाई के साथ संतुलन बनाना भी जरूरी है। जब आप अच्छी चीजें होते हुए देखते हैं, तो आप उस ऊर्जा को और ज्यादा प्रगति हासिल करने में इस्तेमाल करें। इस समय आप उन चीजों पर ध्यान दें जो बताती हैं कि दुनिया बेहतर हो रही है। इनसे आप इसे और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होंगे।

हमारे विचार बीज हैं, कर्म वृक्ष –

हम अपने जीवन में जो कर्म करते हैं। वे उन विचारों के परिणाम होते हैं, जो हमारे मन में आते हैं। यानी कहा जा सकता है कि हमारे विचार एक बीज हैं और हमारे कर्म उनके वृक्ष। अगर बीज ही बुरा होगा तो उसका वृक्ष भी उतना ही बुरा होगा। इसलिए अगर आप अच्छे कर्म करना चाहते हैं तो आपको अच्छे बीजों यानी अच्छे विचारों की जरूरत होगी। अगर आप अपने काम को सबसे बेहतर बनाना चाहते हैं तो आपको अपने विचारों को उतना ही बेहतर बनाने की जरूरत होगी। अगर हम इसे बेहतर नहीं बनाएंगे तो प्रकृति ऐसी स्थितियों को जन्म देगी जो हमें हमारा बुरा पक्ष बार-बार दिखाएगी। वह हमें बार-बार सुधार का अवसर देती रहेगी।

मन को कैसे जीतें –

जो हम आज हैं, वैसे कल नहीं होंगे। इसी तरह हमारे विचार भी। हमेशा स्थायी नहीं हो सकते। मन एक कच्ची मिट्टी की तरह है। जिसे आप अपनी इच्छाशक्ति से कोई भी आकार दे सकते है। आपका मन बार-बार भटकेगा, व्योंकि वह माया से बना है, लेकिन बार-बार अभ्यास करने से वह एक जगह स्थिर होने लगेगा। लगातार अभ्यास ही मन को जीतने का फॉर्मूला है।

दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की सकारात्मकता पर यह आर्टिकल आपको कैसा लगा ? ताकि हम ऐसे ही ओर प्रेरणादायक आर्टिकल आपके लिए प्रकाशित करते रहें।

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