December 9, 2022
Mai Naukarani Nahi Hindi Story

मैं नौकरानी नहीं । Emotional Story । Mai Naukarani Nahi Hindi Story

Mai Naukarani Nahi Hindi Story

सरला थकी-हारी बैंक से लौटी और घर की बेल बजाई। दो बार बेल बजाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो आवाज भी लगाई- स्नेहा, ओ स्नेहा। सरला को पता था कि स्नेहा अपने कानों पर हेडफोड लगाकर बैठी होगी। इतनी जल्दी सुनाई कहां से देगा! थोड़ी देर बाद दरवाजा धड़ाम से खुला। स्नेहा ने यूं घूरकर देखा जैसे सरला ने कोई गलती कर दी हो।

‘पानी ला दो स्नेहा।’ सोफे पर पसरते हुए सरला ने अपनी इकलौती 18 साल की बेटी से कहा।

‘मैं आपकी नौकरानी नहीं। दरवाजा खोलने के कारण वैसे भी मुझे अपना काम बीच में छोड़ना पड़ा है। मैं और समय बर्बाद नहीं कर सकती।’ यह कहते हुए स्नेहा अपने कमरे में चली गई।

सरला के मन में तो आया कि एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दे। मगर वह घर आते ही कोई झगड़ा नहीं चाहती थी। तो बिना कुछ बोले थोड़ी देर सोफे पर ही बैठे-बैठे आंख बंद कर सोचती रही, ‘कैसा समय आ गया है ! अपनी थकी हुई मां को पानी देना भी बेटी को नौकरानी बनना लगता है। एक हम थे। जब भी पापा ऑफिस से आते थे तो मुझमें और भैया में रेस लगती थी कि कौन पापा को पहले पानी देता है। घर में नियम ही था कि कोई भी आगंतुक हो, उससे पानी का पूछना ही था, चाहे फिर वह कोई प्लंबर, इलेक्ट्टरिशियन या बढ़ई अथवा चंदा लेने वाला ही क्यों ना हो!

‘हाय… वे कैसे दिन थे? एक ठंडी सांस लेते हुए सरला ने सोचा, चलो, पानी मैं खुद ही पी लेती हूं। मांजी के लिए चाय भी तो बनानी है।

पहले पानी पिया, फिर चाय चढ़ाई। कपड़े बदलकर चाय-बिस्किट लेकर मांजी के कमरे में पहुंची। मांजी उसे देखकर मुस्कराकर बोली, ‘देखो, अगले एक हफ्ते तक रूपा नहीं आएगी। तुम अकेले क्या-क्या करोगी, सब्जी मुझे दे देना, मैं काट दूंगी’।

ठीक है मां, पहले चाय पी लिजिए। आपने दवाइयां तो समय पर ले ली थीं ना? हां, हां, तुम मेरी चिंता मत करो।’ रूपा उनके घर पर काम करने वाली मेड है। जब से वह एक हफ्ते के लिए गांव गई है, तंब से सरला महसूस कर रही है। कि घर के छोटे-मोटे काम भी कोई नहीं कर रहा। अब मांजी से तो ज्यादा अपेक्षा नहीं कर सकते, लेकिन घर में दूसरे भी तो हैं जो कुछ न कुछ तो कर ही सकते हैं। पर जब घर में ‘मैं तुम्हारा नौकर या नौकरानी नहीं’ जैसे भाव होंगे तो वह भला कैसा घर होगा!!

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर सरला ने सारे काम खुद ही कर दिए। आज उनके पति राज को भी तीन दिन के लिए मैसूर जाना था। तो वे सुबह की फ्लाइट से वहां के लिए निकल गए। फिर सरला को ध्यान आया कि स्नेहा अभी तक कॉलेज नहीं गई।

‘क्या कर रही हो स्नेहा? कॉलेज के लिए देर नहीं हो रही क्या ?’

‘ओ मां! मेरा सफेद कुर्ता नहीं मिल रहा, आज वही पहनकर जाना है कॉलेज में। नुक्कड़ नाटक है। मैंने उसमें भाग लिया है। यही ड्रेस कोड है सफेद कुर्ता व ब्लू जींस, प्लीज ढूंढ दो ना मां?

‘देखो, मैं तुम्हारी नौकरानी नहीं हूं’ कहकर सरला दूसरा काम करने लगी। सुनकर स्नेहा चौंक गई। उसे अपनी कल की कही बात याद आ गई। लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसे गले लगाते हुए सरला ने कहा, ‘मैं तुम्हारी नौकरानी नहीं हूं तुम्हारी मां हूं। तुम्हे हरान-परेशान नही देख सकती। कुर्ता जरूर मिल जाएगा।’

थोड़ी देर में ही कुर्ता हाथ में था। सरला ने कुर्ता प्रेस करके स्नेहा को दिया तो वह काफी लज्जित महसूस कर रही थी। फिर सरला ऑफिस और स्नेहा कॉलेज निकल गई।

करीब एक बजे सरला का ध्यान अपने फोन पर गया तो वहां स्नेहा के 20 मिसकॉल पड़े थे।

‘क्या हो सकता है?’ घबराकर वापस फोन किया।

‘मम्मा दादी के पेट में तेज दर्द हो रहा है, जल्दी घर आइए।’

‘अच्छा बेटा, मैं आती हूं। तुम तब तक गर्म पानी की सिकाई करो।’

सरला तुरंत घर पहुंची और वहां से मांजी को लेकर अस्पताल। स्नेंहा को घर पर ही रहने को कहा। उनका पूरा दिन अस्पताल में बीता, न जाने कितने टेस्ट करवाए। प्रीकॉशनरी तौर पर मांजी को भर्तीं भी कर लिया गया था। रात को सरला को ही अस्पताल में रुकना था। शाम के 7 बज रहे थे। स्नेहा एक बड़े से बैग के साथ उनके सामने खड़ी थी।

‘तुम ! तुम यहां कैसे ?”

‘मां आप यहां रुकोगी तो खाना, पानी व कपड़ों की आपको जरूरत तो होगी। वही लेकर आई हूं। आपके लिए सब्जी व दादी के लिए खिचड़ी बनाई है। ‘तुमने बनाई ? कैसे?

‘क्या मां! आजकल गूगल मां हर समय उपलब्ध है, वहीं से सीखा’, हंसे हुए स्नेहा बोली।

सरला की आंखें छलकने को उतावली होने लगीं, मगर फिर धीरे-से बोली, ‘पर तुम तो मेरी नौकरानी नहीं हो ना?

‘हां, हां मैं आपकी नौकरानी नहीं हूं। मैं बेटी हूं, एक जिम्मेदार बेटी .. स्नेहा के चेहरे पर गर्व के भाव उभर आए।

कहानी लेखिका – अवन्ति श्रीवास्तव

आशा करते है कहानी आपको पसंद आई होगी। दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की “मैं नौकरानी नहीं” कहानी आपको कैसी लगी ?

इसे भी पढ़े

गिन्नी आंटी

पैसा नहीं खुशियां चाहिए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *