September 24, 2022
Good Thinking In Hindi

सफलता के लिए सही सोच अपनाएं । Good Thinking In Hindi

Good Thinking In Hindi

संसार में हम ऐसे लोगों से घिरे हैं, जो विकास की यात्रा में चेतना के विभिन्न स्तरों पर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि कुछ लोग हमें परेशान करेंगे, हमारी बुराई करेंगे या हमारे ध्येय पवित्र होने के बावजूद हमारा बुरा करेंगे। ऐसे में रतन टाटा से प्रेरणा लें कि हमें आहत करने वालों से कैसे निपटना चाहिए।

वर्ष 1991 में टाटा मोटर्स के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। वे एक स्वदेशी कार बनाना चाहते थे। इसी के परिणामस्वरूप इंडिका लॉन्च की गई। इसमें कोई इम्पोर्टेड टेक्लोलॉजी इस्तेमाल नहीं की गई थी। लेकिन सात वर्ष बाद ही 1998 में उन्हें लगा कि यह एक फलदायी परियोजना नहीं है और इसे बेचने का मन बनाया।

फोर्ड मोटर्स ने इस कार फैक्टर को खरीदने में रुचि दिखाई। रतन टाटा अपने पूरे बोर्ड के साथ डेट्रॉयट गए और फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड से मिले। बिल फोर्ड ने कार व्यवसाय में नौसिखिएपन के लिए टाटा का अपमान किया। टाटा ने गरिमापूर्ण चुप्पी कायम रखी, डील कैंसल की और भारत लौट आए। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा फोकस मोटर लाइन में लगा दिया और इस क्षेत्र में एक विश्वस्तरीय व्यवसाय स्थापित किया।

समय का पहिया ऐसा चला कि 2008 की मंदी में फोर्ड मोटर्स दिवालिएपन की कगार पर आ गई। उनकी प्रीमियम सेगमेंट कारें जगुआर-लैंड रोवर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही थीं। टाटा मोटर्स ने उन्हें खरीदने का प्रस्ताव रखा। बिल फोर्ड बातचीत के लिए बम्बई आए और कहा कि टाटा उनसे ये कारें खरीदकर उन पर अहसान कर रहे हैं। रतन टाटा चाहते तो बिल फोर्ड का अपमान कर बदला ले सकते थे, लेकिन वे चुप ही रहे। वे लकीर छोटी करने के बजाय बड़ी लकीर खींचने में यकीन रखते थे। अगर किसी ने आपको चोट पहुंचाई है तो सबसे अच्छा यही होगा कि पहले से भी बेहतर मनुष्य बन जाइए। यही सबसे अच्छा जवाब भी होगा।

हम भी इन तीन तरीकों से आलोचनाओं का सामना कर सकते हैं –

1.स्वीकार कर लें कि आप परफेक्ट नहीं है – हर व्यक्ति में दोष होते हैं, अगर आपका बॉस कहता है कि आप जितना कर सकते थे, उतना नहीं कर पा रहे हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि वे आपको आलसी कह रहे हैं। इसका यह मतलब है कि वे अपने कर्मचारी की ग्रोथ चाहते हैं और वे चाहते हैं कि बह अपनी अधिकतम सम्भावनाओं को अर्जित करे। जब हम इस बात को स्वीकार कर लेते हैं तो पहले से बेहतर बन जाते हैं।

2. रचनात्मक-ध्वंसात्मक आलोचना में फर्क को समझें – कोई व्यक्ति किस मंशा से फीडबैक दे रहा है, इसे पहचानें। अगर शिक्षक या वरिष्ठ व्यक्ति ऐसा कर रहा है तो बहुत सम्भव है वह आपको बेहतर बनाना चाहता है। लेकिन अगर यह शत्रुतापूर्ण रुख रखने वाले व्यक्ति की तरफ से आ रहा है तो देखें कि वह आपका भला चाहता है या नहीं। अगर लगता है कि आलोचना केवल हर्ट करने के लिए है तो उस पर कान मत दीजिए।

3. आलोचना भी स्वीकारें – अगर आलोचना ईमानदारी और सहायतापूर्ण तरीके से हो तो उस आलोचक को धन्यवाद दें। उसकी मदद से ही आप बेहतर व्यक्ति या पेशेवर बनेंगे। उस तरह का आभार-प्रदर्शन परिपक्वता की भी निशानी है। याद रखें एक क्रिटिकल कमेंट भर ही आपका समग्र मूल्यांकन कभी नहीं कर सकेगा। हमेशा ही सबसे अच्छा कहलाने की प्रवृत्ति से भी ऊपर उठें।

श्रीमद्रगवद्धीता में कहा गया है- जो प्रशंसा और आलोचना को समभाव से ग्रहण करते हैं, वो मुझे प्रिय हैं। संसार में अच्छा करेंगे तो बुरे लोग आपकी आलोचना करेंगे, बुरा करेंगे तो भले लोग आलोचना करेंगे। कोई न कोई तो आलोचना करेगा ही। तो उस पर अपनी ऊर्जा और समय क्यों गंवाना? अच्छा कहलाने के लिए इतनी मेहनत क्यों करना। इससे तो बेहतर होगा कि सच में उस तरह से अच्छा बनें कि आपका जीवन बदल जाए।

हम आशा करते हैं कि “सफलता के लिए सही सोच अपनाएं” आर्टिकल आपको पसंद आया होंगा। जिससे आपको अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक बनाने और अपनी सफलता प्राप्त करने में सहयोग मिलेंगा। दोस्तो कृपा कमेंट के माध्यम से जरूर बताइगा की Good Thinking In Hindi आर्टिकल आपको कैसा लगा ? ताकि ऐसे ही ओर आर्टिकल हम आपके लिए प्रकाशित करते रहे।

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